Friday, May 22, 2015

कहने भर के है

कहने भर के है 


सिर्फ कहने भर के है आज सभी 
गोरे धंधे की आड़ में काले धंधे हैं । 
फिर भी 
चौड़े सीने  के साथ अपने आप को 
झुठलाते है। 
सभी  भोग-विलास भोगने को ललायित है ।  
इसलिए 
अच्छे बुरे का आकलन बेमानी है । 
कानून का भी डर कहाँ रहा ? 
जमानत मिलती है । 
जेल में हर सहुलियत पैसे के दम पर मिलती है । 
सिर्फ कहने भर के है आज सभी 
जिसमे 
राजनैतिक दल पहले नंबर पर आते है।  
बाकी 
सभी उनके पीछे-पीछे राग अलापते है  । 

 

0 Comments:

Post a Comment

Subscribe to Post Comments [Atom]

<< Home