कहने भर के है
कहने भर के है
सिर्फ कहने भर के है आज सभी
गोरे धंधे की आड़ में काले धंधे हैं ।
फिर भी
चौड़े सीने के साथ अपने आप को
झुठलाते है।
सभी भोग-विलास भोगने को ललायित है ।
इसलिए
अच्छे बुरे का आकलन बेमानी है ।
कानून का भी डर कहाँ रहा ?
जमानत मिलती है ।
जेल में हर सहुलियत पैसे के दम पर मिलती है ।
सिर्फ कहने भर के है आज सभी
जिसमे
राजनैतिक दल पहले नंबर पर आते है।
बाकी
सभी उनके पीछे-पीछे राग अलापते है ।

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