बचपन की चंचलता
बचपन की चंचलता
बचपन
मासूमियत और भोलेपन की हैं निशानी
चंचलता
आँखों की चमक ओठों की मुस्कान की कहानी
सबसे विशेष होता हैं ये बचपन
सबसे अनमोल होता हैं ये क्षण
नन्हे से बच्चे की होती हैं नन्ही हंसी
जिसे देख मिलती हैं एक प्यारी सी ख़ुशी
उनकी बातें उनकी हरकत होती
सबसे जुदा
मन को बहती हर पल इनकी
अदा
चाहत,उम्मीदों और गुमो से होते दूर
हर दिन जीते ख़ुशी से भरपूर
सूरज,चंद्रमा के समान होता
उनका मुखमंडल
छोटे से मुखे में छिपा होता जीने का मन्त्र
बचपन होती अनकही ,अनबेली
जो सिखाता जीने की नयी पहेली
देख औरो के बचपन को
होती लालसा मेरे मन को
काश
मैं भी होती बचपन के पड़ाव पर
चंचलता के डाल पर
होती न दूर ये मुझसे किसी भी राह में
तब
जिन्दगी जीती मैं खुशहाल मैं
लेकिन
बचपन को चंचलता अब मेरा नहीं रहा
हूँ मैं वह लहर जिसका किनारा नही रहा

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