बड़े बड़े मकान
बड़े बड़े मकान
बड़े बड़े मकानों में
छोटे छोटे विचारो के लोग रहते है
बहार से देखे तो
अमीर कहलाते हैं
भीतर जाते ही मन के सबसे
गरीब पाये जाते है
खुद के आलावा उन्हें किसी का
मोल नहीं
मोह नहीं
खुद के गुमान में
दुसरो की पहचान भूल जाते है
बड़े बड़े मकानों में
इंसानों ज्यादा
जानवरों की पहचान होती है
कद्र होती है।

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