कविता लिखनी की भी एक शर्त होती है
1 कविता लिखनी की भी एक शर्त होती है
कविता लिखनी की भी एक शर्त होती है
यह शर्त भी कई बार बेअसर होती है
हाथ कलम तो पकड़ना चाहती है
पर कलम शब्द फूटने से परहेज़ करती है
यह शर्त भी कई बार बेअसर होती है
हाथ कलम तो पकड़ना चाहती है
पर कलम शब्द फूटने से परहेज़ करती है
ढलती शाम का सूरज और उगती शहर की लालिमा
मन को शीतलता के काफी करीब तक ले जाती है
जहन में बुनते हुए उथल पुथल ठहराव को तलाशती है
तब मन कविता के भाव को उकेरती है और शब्दों में पिरोती है
मन को शीतलता के काफी करीब तक ले जाती है
जहन में बुनते हुए उथल पुथल ठहराव को तलाशती है
तब मन कविता के भाव को उकेरती है और शब्दों में पिरोती है
कभी अपनी सी कभी पराई सी प्रतीत होती है
जब भी उमड़ती है तो बेपनाह उमड़ती है
जब भी उमड़ती है तो बेपनाह उमड़ती है
जहां चाह वहां राह फिर तो चक्कर घिरनी सी घूमती है
रह रह कर हाल ए दिल, दर्द ए जुबां बयान करती है
रह रह कर हाल ए दिल, दर्द ए जुबां बयान करती है
यह तो अठखेलियों सी अल्हड़पन करती है
यह तो तितली बन हर जुबां का हाल जान लेती है
लेकिन अक्षरों में सिर्फ सिमटने में वक़्त लगाती है
यह तो तितली बन हर जुबां का हाल जान लेती है
लेकिन अक्षरों में सिर्फ सिमटने में वक़्त लगाती है

0 Comments:
Post a Comment
Subscribe to Post Comments [Atom]
<< Home