Wednesday, December 9, 2015

मौत और जिन्दगी

मौत और जिन्दगी 
कौन कहता हैं 
मौत डरने की चीज़ हैं 
हम कहते हैं 
डरने  की चीज़ तो जिन्दगी हैं 
मौत तो 
पल में आती,चली जाती हैं 
मगर 
जिन्दगी आती तो हैं पल में 
जाती देर में हैं 
पूछो उन लोगो से तुम 
वह जिन्दगी भी क्या 
जिन्दगी हैं 
जिनके राह  में सदैव भरा हो कांटा
हर दिन हो गमो और दुखो का सामना 
जीते हो जो हर क्षण 
घुट-घुटकर घुट-घुटकर
आपने नसीब पर 
रो-रोकर रो-रोकर
जिसे हर लम्हा जिन्दगी से दूर करता 
वो दिल मौत की चाहत करता 
पूछो उन लोगो से तुम 
जो जिन्दगी भर करता संघर्ष 
लेकिन
उसे मिलता न एक पल का हर्ष 
पूरी न हो मन की न आशा 
लगे सारा जीवन निराश 
भाग्य को कोसता 
अपने पर रोता 
वो जिन्दगी 
मौत को अपना हमसफ़र एंता 
पूछो उन लोगो से तुम 
दिन भर में जिसे न मिलती एक रोटी 
घर का पता नहीं 
रहते फुटपाथ पर 
जिन्दगी का पता नहीं 
कब आ जाये मौत खता नहीं 
जिन्दगी से ज्यादा 
मौत से करता प्यार 
तो क्यों 
मौत से डरता संसार 
ना भागो मौत से तुम 
ना डरो यह तो हैं तुम्हारी ही परछाई 

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