मौत और जिन्दगी
मौत और जिन्दगी
कौन कहता हैं
मौत डरने की चीज़ हैं
हम कहते हैं
डरने की चीज़ तो जिन्दगी हैं
मौत तो
पल में आती,चली जाती हैं
मगर
जिन्दगी आती तो हैं पल में
जाती देर में हैं
पूछो उन लोगो से तुम
वह जिन्दगी भी क्या
जिन्दगी हैं
जिनके राह में सदैव भरा हो कांटा
हर दिन हो गमो और दुखो का सामना
जीते हो जो हर क्षण
घुट-घुटकर घुट-घुटकर
आपने नसीब पर
रो-रोकर रो-रोकर
जिसे हर लम्हा जिन्दगी से दूर करता
वो दिल मौत की चाहत करता
पूछो उन लोगो से तुम
जो जिन्दगी भर करता संघर्ष
लेकिन
उसे मिलता न एक पल का हर्ष
पूरी न हो मन की न आशा
लगे सारा जीवन निराश
भाग्य को कोसता
अपने पर रोता
वो जिन्दगी
मौत को अपना हमसफ़र एंता
पूछो उन लोगो से तुम
दिन भर में जिसे न मिलती एक रोटी
घर का पता नहीं
रहते फुटपाथ पर
जिन्दगी का पता नहीं
कब आ जाये मौत खता नहीं
जिन्दगी से ज्यादा
मौत से करता प्यार
तो क्यों
मौत से डरता संसार
ना भागो मौत से तुम
ना डरो यह तो हैं तुम्हारी ही परछाई

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