Friday, January 12, 2018

प्यारी सी जिंदगी

 प्यारी सी जिंदगी 

बहुत प्यारी सी जिंदगी लगी कल रात मुझे
सुनहरी सी रात की शुरुआत में मैं
साथ तुम्हारे खुले सड़कों की आवोहवा को महसूस रही थी
खुद मदहोशी थी
लेकिन तुम्हारी मदहोशी को संभाल रही थी
तुम्हारी शरारती नज़रों को
खुद की लडखडाती हुई कदमों से रोक रही थी
तुम्हारे प्यार भरे अल्फ़ाज़ों को
खुद की मदहोशी में धीरे-धीरे घोल रही थी
कुछ देर एक दूसरे को थामे हम चलते रहे
दुनिया की फ़िक्र छोड़
एक दूजे में खोते रहे
मदहोशी के भरपूर आगोश में भी
तुम्हारा मेरे लिए हर ख़ुशी बटोर लेना
मन के सागर से पलकों को भीगोता रहा
मेरी बिंदास खोयाइशों में से एक खोयाईश पूरी हो रही थी
मन और दिल दोनों को राहत मिल रही थी
सब कुछ हौले हौले से फिसल रहा था
पर
मन इन सब कुछ को वक़्त के घेरे में कैद कर लेना चाहता था

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