Friday, January 29, 2016

लगभग छह महीने से मैं अपने बस स्टॉप पर हर दिन एक आदमी को देखती हूँ और उसके कमाई के धंधे को भी। मैं जिस भी वक़्त बस स्टॉप पर पहुंचूं , वह आदमी मुझे जरूर दिखाई पड़ता है। वह आदमी हर बस में चढ़ता है और जो सवारी अपनी सीट ना छोड़ कर टिकट लेने के लिए नहीं उठता है, उन सभी से वह टिकट लाने के लिए पैसे ले लेता और बस में भीड़ बढ़ जाने पर वह सभी के पैसे ले कर बस से उतर जाता है। हर रोज़ वह यही करता है, यही उसके कमाई का जरिया है। मैं तो उसे पहचान चुकी हूँ तो बस में अपने सामने किसी भी सवारी को उसे पैसे नहीं देने देती हूँ। और ना ही मैंने कभी अनजाने में भी उससे टिकट मनवाई।

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