Wednesday, April 20, 2016

धुआं उड़ाने की चाहत

धुआं उड़ाने की चाहत

धुआं उड़ाने की चाहत ने मुझसे
सिगरेट की चोरी कराई
इस चोरी में डर नही था,
थी तो बस धुआं उड़ाने की उत्सुकता

अक्सर मुझे धुआं उड़ाने वाले बिंदास और बेफिक्री नज़र आते
ये अदा ही मुझे धुआं उड़ाने की चाहत को बेक़रार करती

सिगरेट चोरी की थी
तो जल्दी जलाकर छुपाना था
माचिस की तीली से हडबडाहट में जलाया सिगरेट
और पहले ही कश में धुआं खीच लिया अन्दर तक

और महसूस करना चाहा की
कैसे बेफिक्र हुआ जाता है ?

लेकिन
धुआं भीतर ही भीतर घूम रहा
और मेरी बेचैनी को बढाता जा रहा
इसके बाद कुछ समझ नही आया
आँखों में खूब सारा आंसू भी भर आया

फिर भी
दूसरा कश लिया और सिगरेट को
ऐस ट्रे में दबाकर बुझा दिया
मैंने दुसरे कश के धुंए को मुहँ से
बहार किया
और खुद को जलती हुई
बेचैनी से दूर किया   

बेफिक्री तो नही, जलती हुई बेचैनी को
नजदीकी से महसूस किया
खैर
फिर कभी कश को अंदाज़ में उड़ाया जायेगा
आज तो
कोशिश पहली थी

अभी धुआं उड़ाने की कला सीखनी बाकी है .