Friday, May 20, 2016

नारी

नारी

सबसे कोमल मन पाया है
नारी रूप में जन्म लिया है

हर रिश्ते को सहेजती हूँ
हर पल प्रेम को समेटती हूँ

ना कोई शर्त ना कोई नियम
बस हर शक्स में खुद को
टटोलती हूँ

जब भी मन पसीजता है
दो आंसूं बहा लेती हूँ

जिस रात भी निराशा हाथ लगती है
अगली सुभ उम्मीद का दामन फिर पकड़ लेती हूँ

तभी मैं नारी कहलाती हूँ 

अच्छे थे जब हम बच्चे थे

अच्छे थे जब हम बच्चे थे

अच्छे थे जब हम बच्चे थे
बस हम थे और
हमारे खेल थे
ना दुनिया थी
ना दुनियादारी  थी
बस हम थे
और हमारे खेल थे

चकोर आंगन था
और चार दोस्त थे
बस हम थे
और हमारे खिलोने थे
ना विचार थे
ना विचारधारा थी
बस हम थे और
हमारे खेल थे

नासमझ थे
और हमारी नादानी थी
बस हम थे
और हमारे जादुई सपने थे
ना मत थे
ना मतभेद थे

बस हम थे और
हमारे खेल थे

मासूम थे
और मासूमियत से लबरेज़ थे
बस हम थे
और हमारे अलहड़पन थे
ना दंगे थे
ना दंगे भरे अल्फाज़ थे
बस हम थे और

हमारे खेल थे