प्रेम की इबादत
प्रेम की इबादत
तेरे प्रेम की इबादत को पूजते है
तेरा साथ पाकर अल्लाह का शुक्रिया अदा करते है
मुझे हर ख़ुशी नवाज़ने की तेरी जो शिद्दत है
उस पाक़ मन को नज़र ना लगे मेरी मिन्नत है
मेरे रूह में बसा तेरे प्रेम का हर अल्फाज़ है
नूर-ए-मोहब्बत तेरे हर स्पर्श का अहसास है
आँखों का नूर, ताज़-ए-सरताज़ से नवाज़ते हो मुझे
दिल-ए-तसब्बुर में बसा के रखते हो मुझे
या अल्ला ये नज़र-ए-इनायत मुझ पर बनाये रखना
मेरे यार की सलामत-ए-बख्श बनाये रखना
