सपनो की दुनिया
सपनो की दुनिया
सपनो की दुनिया लगती हैं
सुहानी
कुछ अनकही कुछ अनसुनी
कुछ सच्ची तो कुछ झूठी
बस
ऐसे ही सपनो की चादर बुनती
कभी धरती पर झूमे
कभी गगन को चूमे
हर पल
कल्पना की डोर पकड़ उडती रहती
हर वकत
हवा से बाते करती
सपनो में मिलती वो सारी खुशियाँ
जिनकी होती हमें कमियां
सपने तो हैं सभी देखते
लेकिन
इसके टूटने से हैं
डरते
सपनो का क्या
ये तो हैं
रेट का घरोंदा
कभी बनता तो कभी टूटता
बस
ऐसे ही सभी को अपना बनाता
