Wednesday, September 9, 2015

सपनो की दुनिया

सपनो की दुनिया 


सपनो की दुनिया लगती हैं 
सुहानी 
कुछ अनकही कुछ अनसुनी 
कुछ सच्ची तो कुछ झूठी 
बस 
ऐसे ही सपनो की चादर बुनती 
कभी  धरती पर झूमे 
कभी  गगन को चूमे 
हर पल 
कल्पना की डोर पकड़ उडती रहती 
हर वकत 
हवा से बाते करती 
सपनो में मिलती वो सारी खुशियाँ 
जिनकी होती हमें कमियां 
सपने तो हैं सभी देखते 
लेकिन 
इसके टूटने से हैं 
डरते 
सपनो का क्या 
ये तो हैं 
रेट का घरोंदा 
कभी बनता तो कभी  टूटता 
बस 
ऐसे ही सभी को अपना बनाता

बचपन की चंचलता

बचपन की चंचलता 

बचपन 
मासूमियत और भोलेपन की हैं निशानी 
चंचलता
आँखों की चमक ओठों की मुस्कान की कहानी 

सबसे विशेष होता हैं ये बचपन 
सबसे अनमोल होता हैं ये क्षण 
नन्हे से बच्चे की होती हैं नन्ही हंसी 
जिसे देख मिलती हैं  एक प्यारी सी ख़ुशी 
उनकी बातें उनकी हरकत होती 
सबसे जुदा 
मन को बहती हर पल इनकी 
अदा 
चाहत,उम्मीदों और गुमो से होते दूर 
हर दिन जीते ख़ुशी से भरपूर 
सूरज,चंद्रमा के समान होता 
उनका मुखमंडल 
छोटे से मुखे में छिपा होता जीने का मन्त्र 
बचपन होती अनकही ,अनबेली 
जो सिखाता जीने की नयी पहेली 
देख औरो के बचपन को 
होती लालसा मेरे मन को 
काश 
मैं भी होती बचपन के पड़ाव पर 
चंचलता के डाल पर 
होती न दूर ये मुझसे किसी भी राह में 
तब 
जिन्दगी जीती मैं खुशहाल मैं 
लेकिन  
बचपन को चंचलता अब मेरा नहीं रहा 
हूँ मैं वह लहर जिसका किनारा नही रहा 

मन

मन 


मन पर जोर चले ना काहे का 
मनमीत होवे हैं अपने मन का 
करे वही जो कहना हो दिल का 
परवाह न करे ये किसी बंधन का 

मन होता हैं चंचल 
जो दिलो में मचाता हैं हलचल 
हर वक़त करे नये इच्छाओं की तलाश 
कभी न करे किसी को हताश 

 सपनो में रहना, कल्पनाओ में बहना 
हैं इसका काम 
आकाश से बातें करना 
समुंद्र की सैर करना 
है इसकी पहचान 

पल में अपना , पल में पराया बन जाये 
कब कोई मन  में बसे या मन  से दूर हो जाये 
खबर न किसी को इसकी लग पाए 
ये तो  सभी को अपनी ऊँगली पर नचाये 

सभी को फ़साये  मन अपने मोहजाल में 
पहचान न करे अच्छे बुरे का किसी भी हाल  में
गुम हो जाये ये भेडचाल में 
भारी  पड़े सब पे ये हर काल  में 

मन का  क्या 
यह तो है एक मिटटी का घड़ा 
जिसे जैसा चाहो वैसा ढल जाये 
सभी को अपने गुणों से आकर्षित किये जाये
 
जैसे रखता सारथि घोड़े के लगान  को 
अपने वश में 
वैसे रखो मन को नियंत्रण में लेकिन 
यह न होता सम्भव 
हर कार्य कर दें असम्भव 

राम जाने इसकी कथा 
इसमें छुपी हैं ना जाने 
कितनी ही व्यथा 
चेहरा हैं मन का आइना 
अब इससे जायदा क्या हैं कहना ?