रिशवत
रिशवत
नया युग
हैं नया शब्द
रिशवत
आज के युग में परिचित हैं सभी
इस नाम से
सिर्फ
इसके रूप हैं अलग - अलग
कहीं उपहार के रूप में
कहीं फिरौती के रूप में
तो कहीं
जागरण व चन्द के रूप में रिशवत
दिए और लिए जाते हैं
चारो ओर हैं इसकी मांग
चाहे
हो डाक्टर या नेता
लेते सभी हैं रिशवत
जो
दे रिशवत वह विदवान कहलाये
और
जो करे इसका विरोध वह मुर्ख कहलाये
मेहनत,ईमानदारी का करते अपमान
रिशवत का करते सम्मान
हैं यह नया युग
जहाँ हैं बोलबाला रिशवत का
हैं जमाना रिशवत देने व लेने का
करवा रिशवत के दवारा हर काम
कहलाये अपने को कामयाब इन्सान
अगर
ऐसा ही चलता रहे
तो
खत्म हो जाएगी ईमानदारी
छोड़ देने मेहनत करना
और
हरपल गुणगान करेंगे रिशवत का
जो सही न होगा
भारतीय सभ्यता के लिए
खोखला कर देगी
हमारे जमीर को
बर्बाद कर देगी हमारे
आधुनिक नवयुवक को
