Sunday, November 15, 2015

बदनाम होने का डर

बदनाम होने का डर 

मन चाहता हैं बहुत कुछ 
पर डरता क्यों हैं ?
बदनाम तो हर वो आदमी हैं 
जो 
आज उचाईयों पर हैं 
फिर 
घबराता क्यों हैं ?
समाज एक से नहीं 
कई व्यक्ति व समूह  से बना हैं । 
सबका अपना - अपना नजरिया हैं । 
सबकी अपनी -अपनी सोच हैं । 
फिर क्या हैं बदनाम 
और 
क्यों हैं बदनाम, यह कौन तय करेगा ?
इसकी परिभाषा ही अपरिभाषित हैं ।


बड़े बड़े मकान

बड़े बड़े मकान

बड़े बड़े मकानों में 
छोटे छोटे विचारो के लोग रहते है 
बहार से देखे  तो 
अमीर  कहलाते हैं
भीतर जाते ही मन के सबसे 
गरीब पाये जाते है 
खुद के आलावा उन्हें किसी का 
मोल नहीं 
मोह नहीं 
खुद के गुमान में 
दुसरो की पहचान भूल जाते है 
बड़े बड़े मकानों में 
इंसानों ज्यादा 
जानवरों की पहचान होती है 
कद्र होती है।